एम. के. स्टालिन पर मनोज तिवारी का हमला, बोले- सनातन विरोधियों को जनता ने नकारा
चेन्नई: तमिलनाडु की सियासत में दशकों से चले आ रहे द्रविड़ किलों को ढहाते हुए अभिनेता विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) ने ऐतिहासिक बढ़त बना ली है। मतगणना के शुरुआती रुझानों में विजय की पार्टी 100 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है, जिससे वह राज्य में सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरती दिख रही है। इस चुनावी लहर ने सत्ताधारी डीएमके को गहरे संकट में डाल दिया है, जो रुझानों में काफी पीछे खिसक गई है। दूसरी तरफ अन्नाद्रमुक (AIADMK) लगभग 70 सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करते हुए दूसरे नंबर पर बनी हुई है, जिससे राज्य का मुकाबला पूरी तरह त्रिकोणीय हो गया है।
सनातन के मुद्दे पर राजनीतिक हमला
चुनाव के बीच भाजपा नेता मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की घेराबंदी करते हुए कड़ा बयान दिया है। तिवारी ने स्पष्ट कहा कि तमिलनाडु की जनता ने उन शक्तियों को करारा जवाब दिया है जो सनातन धर्म को खत्म करने का सपना देख रही थीं। उन्होंने डीएमके के गिरते ग्राफ को सीधे तौर पर उनके पुराने विवादित बयानों से जोड़ते हुए इसे एक बड़ा जनादेश करार दिया है। मनोज तिवारी के इस हमले ने मतगणना के माहौल को और अधिक गर्मा दिया है, क्योंकि भाजपा इसे वैचारिक जीत के रूप में देख रही है।
सत्ता विरोधी लहर और उदयनिधि का बयान
डीएमके की इस संभावित हार के पीछे उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को लेकर दी गई विवादास्पद टिप्पणियों को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। विपक्षी दलों ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को जनता के बीच जमकर भुनाया, जिसका असर अब परिणामों में साफ झलकता दिख रहा है। सत्ता विरोधी लहर और धार्मिक भावनाओं के जुड़ने से डीएमके का वोट बैंक बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बयानों ने न केवल राज्य के भीतर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाया है।
विजय का उदय और नया राजनीतिक युग
यदि वर्तमान रुझान अंतिम नतीजों में तब्दील होते हैं, तो तमिलनाडु में 60 साल पुराने द्रविड़ वर्चस्व के अंत की शुरुआत हो सकती है। विजय की पार्टी न केवल युवाओं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी पैठ बनाती दिख रही है, जिससे पारंपरिक पार्टियों के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। इस समय पूरी राज्य इकाई की नजरें अंतिम राउंड की गिनती पर टिकी हैं क्योंकि विजय की यह 'एंट्री' दक्षिण की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात कर सकती है। राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और समर्थक अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
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