पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में तथ्यहीन आरोपों की राजनीति, अध्यक्ष अजय शर्मा की छवि धूमिल करने का प्रयास
दस्तावेज़ों से परे भावनात्मक शब्दजाल, अपुष्ट सूत्र और अनुमान—युगक्रांति की खबर पर गंभीर सवाल
भोपाल, 6 जनवरी 2026। मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग बोर्ड से जुड़े एक ही विषय को बार-बार अलग–अलग तरीके से तोड़-मरोड़ कर प्रकाशित करना अब गंभीर विवाद का विषय बन गया है। बोर्ड प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि इस तरह की खबरें सूचना देना नहीं, बल्कि दबाव बनाने और ब्लैकमेलिंग की श्रेणी में आती हैं। पुलिस हाउसिंग बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए क्राइम ब्रांच में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि एक ही मामले को बार-बार नए कोण, अपुष्ट आरोप और व्यक्तिगत टिप्पणी के साथ प्रकाशित कर बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
बोर्ड का कहना है कि संबंधित खबरों में न तो किसी सक्षम जांच एजेंसी की रिपोर्ट है और न ही किसी विभागीय कार्रवाई का आधार, इसके बावजूद बार-बार तथाकथित “एक्सपोज़े” के नाम पर सामग्री प्रकाशित की गई। यह तरीका अब सूचना देने की मर्यादा से बाहर निकलकर अवैध दबाव और ब्लैकमेलिंग का स्वरूप ले चुका है। प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक विषयों को व्यक्तिगत चरित्र, रिश्तों और अपुष्ट चर्चाओं से जोड़ना न केवल पत्रकारिता की आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि यह कानूनन अपराध की श्रेणी में भी आता है। क्राइम ब्रांच को दिए गए आवेदन में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि अवैध वसूली, डराने-धमकाने या ब्लैकमेलिंग के तत्व पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षण के बाद जल्द ही ब्लैकमेलिंग और अवैध दबाव बनाने के आरोपों में एफआईआर दर्ज होने की संभावना है। पुलिस हाउसिंग बोर्ड ने साफ किया है कि वह नियम, कानून और संस्थागत गरिमा से समझौता नहीं करेगा। किसी सीनियर पुलिस अधिकारी पर आरोप लगाने से पहले तथ्योंक छान बिन करनी होती है और किसी आईपीएस जो सीनियर पुलिस अधिकारी है यूनिफॉर्म में फोटोछपना अपने आप में ही संवैधानिक रूप से गलत है
बोर्ड का स्पष्ट संदेश
“प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है,
लेकिन तथ्यहीन आरोपों के जरिए दबाव बनाना अपराध है।”
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